किसी कण के कोणीय संवेग की परिभाषा के अनुसार,$\vec{l} = \vec{r} \times \vec{p}$ है।
इस समीकरण का समय $t$ के सापेक्ष अवकलन करने पर,$\frac{d\vec{l}}{dt} = \vec{r} \times \frac{d\vec{p}}{dt} + \frac{d\vec{r}}{dt} \times \vec{p}$ प्राप्त होता है।
चूंकि $\frac{d\vec{p}}{dt}$ रैखिक संवेग के परिवर्तन की दर है,जो बल $\vec{F}$ के बराबर है और $\frac{d\vec{r}}{dt} = \vec{v}$ है,इसलिए $\frac{d\vec{l}}{dt} = \vec{r} \times \vec{F} + \vec{v} \times \vec{p}$ होता है।
चूंकि $\vec{v}$ और $\vec{p}$ एक ही दिशा में हैं,इसलिए उनका सदिश गुणनफल $\vec{v} \times \vec{p} = 0$ होता है।
अतः,$\frac{d\vec{l}}{dt} = \vec{r} \times \vec{F} = \vec{\tau}$ प्राप्त होता है।
इस प्रकार,कोणीय संवेग के परिवर्तन की समय दर कण पर कार्य करने वाले बल आघूर्ण (टॉर्क) के बराबर होती है।